Thursday, 5 April 2018

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा - आधार हर मर्ज की दवा नहीं, बैंकिंग धोखाधड़ी रोकने में कारगर नहीं

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि आधार बैंकिंग धोखाधड़ियों को रोकने के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर सकता. शीर्ष अदालत ने ‘केवल कुछ आतंकवादियों को पकड़ने के लिए’ पूरी जनता से अपने मोबाइल फोन आधार से जोड़ने के लिए कहने पर केंद्र पर सवाल खड़े किए. शीर्ष अदालत ने कहा कि बैंक अधिकारियों की धोखाधड़ी करने वालों से ‘साठगांठ’ होती है. अदालत ने कहा कि ऐसा नहीं है कि घोटाले इसलिए होते हैं क्योंकि अपराधी अज्ञात होते हैं. अदालत ने ये टिप्पणियां उस समय कीं जब केंद्र ने दलील दी कि आधार आतंकवाद और बैंक संबंधी धोखाधड़ी जैसी समस्याओं पर रोक लगाने में मदद करेगा.

पीठ ने कहा, ‘‘धोखाधड़ी करने वालों की पहचान के बारे में कोई संदेह नहीं है. बैंक जानती है कि वह किसे ऋण दे रही है और बैंक अधिकारियों की धोखाधड़ी करने वालों से साठगांठ होती है. आधार इसे रोकने के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर सकता.’’

इस पीठ में न्यायमूर्ति ए के सीकरी, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति अशोक भूषण भी शामिल थे. पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल से कहा कि बैंकिंग धोखाधड़ी कई पहचान पत्रों के कारण नहीं होता है. केंद्र का कहना है कि बायोमैट्रिक्स सुरक्षित हैं और ये ‘‘धन शोधन, बैंक धोखाधड़ी, आयकर चोरी और आतंकवाद’’ जैसी समस्याओं का समाधान कर सकती है. पीठ ने कहा कि आधार मनरेगा जैसी योजनाओं के फर्जी लाभार्थियों को खोज निकालने में अधिकारियों की मदद कर सकता है.

Source:-Zee News

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