लॉस एंजिलिस: मानवीय गतिविधियों से पृथ्वी पर मौजूद स्तनपायी जीवों के व्यवहार में परिवर्तन की खबरों के बीच एक अनुसंधान में पहली बार यह सामने आया है कि इंसानों से बचने के लिए स्तनपायी जीव निशाचर हो रहे हैं. जर्नल ‘ साइंस ’ में प्रकाशित इस अध्ययन में पहली बार यह सामने आया है कि मानवीय क्रियाकलापों से प्रभावित होकर वन्यजीव किस तरह अपने रोजमर्रा की गतिविधियों में परिवर्तन ला रहे हैं. इस अनुसंधान के परिणाम मजबूती से इस बात को उजागर करते हैं कि मानवीय गतिविधियों से परेशान होकर एक बड़ी प्राकृतिक निशाचर जीवों की दुनिया तैयार हो रही है.
अनुसंधानकर्ताओं ने छह महाद्वीपों की 62 प्रजातियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया. इन आंकड़ों से उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि मानवीय गतिविधियों की वजह से स्तनपायी जीवों के रोजमर्रा की दिनचर्या में किस तरह के बदलाव हो रहे हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की शोधार्थी कैटलीन गेनर ने बताया , “ मानवों की तरफ से पेश की जा रही किसी भी परेशानी पर जानवर मजबूती से प्रतिक्रिया देते हैं चाहे यह परेशानी सीधे उनके जीवन के खतरे से जुड़ी हो या नहीं. हमारी मौजूदगी ही उनके जीवन के प्राकृतिक क्रियाकलापों को बाधित करने के लिए काफी होता है. ”
डब्ल्यूसीएस के लातिन अमेरिकी और कैरेबियाई कार्यक्रम के सह निदेशक एवं इस अध्ययन के प्रमुख लेखक डा. मार्टिन मेंडिज कहते हैं कि हमारे संयुक्त रूपात्मक एवं अनुवांशिक अध्ययन के निष्कषोर्ं के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि हंपबैक डॉलफिन की कम से कम चार प्रजातियां हैं. मेंडिज ने हंपबैक डॉलफिन की कम से कम चार प्रजातियों के पहचान की बात कही है, जिसमें पश्चिम अफ्रीका से सटे पूर्वी अटलांटिक में पाई जाने वाली अटलांटिक हंपबैक डालफिन (सोउसा तेउस्जी), मध्य से लेकर पश्चिमी हिंद महासागर में पायी जाने वाली इंडो-पैसीफिक हंपबैक डॉलफिन (सोउसा प्लमबीआ) और पूर्वी हिंद से लेकर पश्चिम प्रशांत महासागर में पायी जाने वाली इंडो-पैसिफिक हंपबैक डॉलफिन (सोउसा चिनेन्सिस) के अलावा उत्तरी ऑस्ट्रेलिया तट के निकट हंपबैक डॉलफिन की एक चौथी प्रजाति पाई गई है, जिसका नाम अभी तक तय नहीं किया गया है.
Source:-ZEENEWS
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अनुसंधानकर्ताओं ने छह महाद्वीपों की 62 प्रजातियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया. इन आंकड़ों से उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि मानवीय गतिविधियों की वजह से स्तनपायी जीवों के रोजमर्रा की दिनचर्या में किस तरह के बदलाव हो रहे हैं. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की शोधार्थी कैटलीन गेनर ने बताया , “ मानवों की तरफ से पेश की जा रही किसी भी परेशानी पर जानवर मजबूती से प्रतिक्रिया देते हैं चाहे यह परेशानी सीधे उनके जीवन के खतरे से जुड़ी हो या नहीं. हमारी मौजूदगी ही उनके जीवन के प्राकृतिक क्रियाकलापों को बाधित करने के लिए काफी होता है. ”
डब्ल्यूसीएस के लातिन अमेरिकी और कैरेबियाई कार्यक्रम के सह निदेशक एवं इस अध्ययन के प्रमुख लेखक डा. मार्टिन मेंडिज कहते हैं कि हमारे संयुक्त रूपात्मक एवं अनुवांशिक अध्ययन के निष्कषोर्ं के आधार पर हम यह कह सकते हैं कि हंपबैक डॉलफिन की कम से कम चार प्रजातियां हैं. मेंडिज ने हंपबैक डॉलफिन की कम से कम चार प्रजातियों के पहचान की बात कही है, जिसमें पश्चिम अफ्रीका से सटे पूर्वी अटलांटिक में पाई जाने वाली अटलांटिक हंपबैक डालफिन (सोउसा तेउस्जी), मध्य से लेकर पश्चिमी हिंद महासागर में पायी जाने वाली इंडो-पैसीफिक हंपबैक डॉलफिन (सोउसा प्लमबीआ) और पूर्वी हिंद से लेकर पश्चिम प्रशांत महासागर में पायी जाने वाली इंडो-पैसिफिक हंपबैक डॉलफिन (सोउसा चिनेन्सिस) के अलावा उत्तरी ऑस्ट्रेलिया तट के निकट हंपबैक डॉलफिन की एक चौथी प्रजाति पाई गई है, जिसका नाम अभी तक तय नहीं किया गया है.
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